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ધોરણ 8 હિન્દી એકમ 1 ક્વિઝ | પત્ર એવં ડાયરી | Std 8 Hindi Unit 1 HOTS Quiz (H8.13, H8.30)

इकाई १ : पत्र एवं डायरी
इकाई १ : पत्र एवं डायरी

दूर बसे अपने संबंधियों, मित्रों, परिवारजनों तथा कभी-कभी विभिन्न अधिकारियों को पत्र लिखने की आवश्यकता रहती है। पत्रों के द्वारा हम अपनी बात अत्यंत सुगमता से उन तक पहुँचा सकते हैं। यद्यपि आजकल दूरभाष (telephone), ई-मेल, इंटरनेट, मोबाइल फोन आदि द्वारा भी यह कार्य किया जाता है, फिर भी पत्रों का महत्त्व कम नहीं हुआ है, क्योंकि:

  • पत्र के द्वारा विस्तार से अपनी बात व्यक्त की जा सकती है।
  • पत्र के द्वारा विचारों को प्रेषित करना अन्य साधनों की अपेक्षा सस्ता है।
  • अधिकारियों तक अपनी बात पहुँचाने, शिकायत करने, आवेदन या प्रार्थना आदि के लिए केवल पत्रों का ही सहारा लिया जा सकता है, अन्य साधनों का नहीं।

पत्र-लेखन (उदाहरण)

१. निमंत्रण पत्र (जन्मदिन के अवसर पर)

90, बुधनगर सोसायटी,
लिंबायत, सूरत-394210
8 अगस्त, 2011

प्रिय मित्र स्नेहल,
सप्रेम स्मरण।

तुम्हें यह जानकर खुशी होगी कि अगले रविवार को मेरा जन्मदिन है। इस बार तो छुट्टी के दिन ही मेरा जन्मदिन है, इसीलिए मैं अपने सभी मित्रों को बुलाना चाहता हूँ और उन सबको आज निमंत्रण भेज रहा हूँ। तुम जानते ही हो कि सालगिरह का दिन कितने आनंद का दिन होता है। उस दिन हमारे कई रिश्तेदार भी यहाँ आयेंगे। बिपिन, साजिद, प्रशांत, सानिया आदि सब अवश्य आएँगे। मैं चाहता हूँ कि तुम भी उस दिन यहाँ जरूर आओ। यदि तुम नहीं आओगे तो हम सबको बुरा लगेगा। हम तो उस दिन सारा समय आनन्द में बिताना चाहते हैं। दिनभर भोजन, जलसा, खेल आदि होगा और रात को सिनेमा देखने भी जाएँगे। मुझे आशा है कि इस अवसर पर तुम भी जरूर आओगे और मेरे उत्साह और आनन्द को बढ़ाओगे。

तुम्हारे माता-पिता को सादर चरण स्पर्श। छोटे भाई कमल और बहन संगीता को प्यार। तुम्हारे आगमन की प्रतीक्षा करूँगा।

तुम्हारा मित्र,
साहिल शाह ।

शब्दार्थ: रिश्तेदार - सगे-संबंधी | उपस्थित - हाजिर | आगमन - आना

२. बधाई-पत्र (सालगिरह पर)

'शांतिसदन', रावपुरा, बड़ौदा
10 अगस्त, 2011

प्रिय मित्र साहिल,
सप्रेम स्मरण।

कल ही तुम्हारा पत्र मिला, तो हम सब बहुत खुश हुए। हमें तुम्हारी सालगिरह का निमंत्रण भी मिला और यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई कि कल ही तुम्हारी सालगिरह है। इधर माँ कुछ दिनों से बीमार रहती है और पिताजी को तो सुबह दस बजे ही दफ़्तर जाना पड़ता है। दर्शना को भी सुबह स्कूल जाना पड़ता है और वह तो है भी छोटी। इसी कारण घर का बोझ मुझ पर ही है। अब तुम ही कहो, यह सारा बोझ किसको सौंपकर तुमसे आ मिलूँ? मेरे दिल में तो बहुत होता है कि इस शुभ अवसर पर, उड़कर तुम्हारे पास आ जाऊँ। परन्तु घर की स्थिति का विचार करके विवश हो जाता हूँ और मन करते हुए भी नहीं आ सकता। तुम तो अब एक साल बड़े हो गए हो। इस अवसर पर मैं तुम्हें बधाई क्यों न दूँ? मैं तो चाहता हूँ कि बार-बार तुम्हारी सालगिरह आया करे और हमें खुशियाँ मनाने का मौका मिले। इस मंगल अवसर पर उपस्थित न रह सकते हुए भी मेरे दिल में तुम्हारे लिए शुभकामना है। मैं चाहता हूँ कि ईश्वर तुम्हें चिरंजीव रखे और तुम्हारा नया वर्ष शुभदायी हो।

तुम्हारा मित्र,
स्नेहल

शब्दार्थ: सालगिरह - जन्मदिन | दफ़्तर - कार्यालय | मंगल - शुभ | विवश - बेबस | चिरंजीव - दीर्घायु

३. आश्वासन पत्र (असफलता पर सखी को)

'मातृछाया', स्टेशन रोड,
कालूपुर, अहमदाबाद
17 नवम्बर, 2011

प्रिय सखी जागृति,
सप्रेम स्मृति।

आज तुम्हारे पिताजी से फोन द्वारा पता चला कि तुम खेल महाकुंभ में चक्रफेंक प्रतियोगिता में असफल रही हो। इस समाचार से मुझे बहुत दुःख हुआ कि तुम्हारा इस प्रतियोगिता में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। हमने तुमसे बहुत आशा लगा रखी थी कि तुम जिले में प्रथम आओगी। प्रिय सखी, खेल में हमेशा जीतना ही महत्त्वपूर्ण नहीं होता। अब जो कुछ होनेवाला था, हो गया है। इसीलिए उसका शोक न करना चाहिए और इस असफलता से निराश भी न होना चाहिए। असफलता भी सफलता का सोपान है। सफलता उन्हीं के चरण चूमती है, जो अपने ध्येयप्राप्ति के मार्ग में ड़टे रहते हैं। अब निराश या हतोत्साह होने से कोई फायदा नहीं है। मैं चाहती हूँ कि अब तुम दुगुने उत्साह से अभ्यास करो तो अगले साल तुम्हें अवश्य सफलता मिलेगी और तुम अपने जिले में ही नहीं गुजरात में प्रथम आओगी। मुझे आशा है कि तुम मेरी बात मानोगी और अपने अभ्यास में मनोयोग से लग जाओगी।

तुम्हारी सखी,
अवनी ।

४. अनुमति पत्र (प्रवास के लिए)

जीवनभारती छात्रालय,
स्टेशन रोड, दाहोद
29 सितंबर, 2011

पूज्य पिताजी,
सादर प्रणाम।

आपका पत्र मिला। सबकी कुशलता जानकर बड़ी खुशी हुई। आप मेरी जरा भी चिंता न करें। आपको सूचित करते हुए मुझे खुशी हो रही है कि हमारी कक्षा के सब विद्यार्थी अगले महीने की 17 तारीख को अजंता-एलोरा की गुफाएँ देखने जानेवाले हैं। मैं भी उस प्रवास में सम्मिलित होना चाहता हूँ। स्कूल-बस की व्यवस्था की गई है। यह प्रवास तीन दिन का रहेगा और 800 रुपए का खर्च आएगा। इस प्रवास में बहुत से दर्शनीय स्थल देखने को मिलेंगे। मेरे सभी साथी मनीष, साहिल, श्रेया, जाकिर, वहिदा, गुरमीत और डेविड भी इस प्रवास में जानेवाले हैं। मैं भी इस प्रवास में शामिल होना चाहता हूँ। आप पत्र द्वारा इस प्रवास के लिए मुझे अनुमति देने और 800 रुपए मनीआर्डर से भेजने की कृपा करें। पूजनीया माताजी को सादर प्रणाम। सोनल को प्यार।

आपका आज्ञाकारी पुत्र,
रमेश ।

५. प्रार्थना-पत्र (छुट्टी के लिए)

देसाई फलिया, भावनगर
23 फरवरी, 2011

सेवा में,
श्री आचार्य महोदय,
डी. ए. सार्वजनिक विद्यालय, भावनगर

आदरणीय गुरुदेव,

सविनय निवेदन है कि मेरी बहन की शादी आगामी 27 तारीख को निश्चित की गई है। मैं उसका इकलौता भाई हूँ। हम लोगों के यहाँ शादी की कितनी धूम रहती है, इससे तो आप अनजान नहीं हैं। फलतः मैं ता. 24 से 28 पाँच दिन तक विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सकूँगा। पिताजी का पत्र इस प्रार्थना-पत्र के साथ भेज रहा हूँ। आशा है, आप मुझे यह अवकाश प्रदान करने की कृपा करेंगे। इसके लिए मैं सदैव आपका कृतज्ञ रहूँगा।

आपका आज्ञाकारी छात्र,
मनोज पटेल
क्रमांक - 25, वर्ग 8 अ

शब्दार्थ: इकलौता - अकेला | फलतः - परिणामतः | धूम - धूमधाम | अवकाश - छुट्टी

६. कार्यालयी पत्र (गंदगी के बारे में)

ता. 20 मई, 2011

सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,
महानगरपालिका, बड़ौदा

मान्यवर,

सविनय निवेदन है कि मैं 'गायत्री मुहल्ले' में रहता हूँ। यह मुहल्ला पिछले कई दिनों से ठीक से साफ नहीं हो रहा है। आजकल शादी का मौसम है। रास्ते पर गंदगी फैली है। पास के कूड़ेदान (डस्टबिन) में सब जूठन डाल जाते हैं। बदबू के कारण पिछले दो दिन से तो यह हाल हो गया है कि वहाँ से आना-जाना भी मुश्किल हो गया है। आने-जाने वाले सभी लोग परेशान हो रहे हैं। यदि गंदगी को शीघ्र न हटाया गया तो मुहल्ले-भर में बीमारी फैल जाने का डर है। आशा है आप शीघ्र ही उसे हटवाने की व्यवस्था करेंगे।

आपका विनम्र सेवक,
सुरेशभाई म. परमार
गायत्री मुहल्ला, बड़ौदा

७. व्यावसायिक पत्र (पुस्तकें मँगवाने हेतु)

ता. 10 जुलाई, 2011

सेवा में,
व्यवस्थापक,
श्री गजानन पुस्तकालय, सुभाष रोड, वलसाड़

महोदय,

मुझे निम्नलिखित पुस्तकों की आवश्यकता है। उन्हें आप डाक से भेजने की कृपा करें:
1. नन्हा कोश - श्री रतिलाल नायक
2. नालंदा विशाल शब्द सागर - श्री नवल जी
3. बृहद् हिन्दी शब्दकोश - डॉ. श्याम बहादुर वर्मा, डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा
4. साहित्यिक मुहावरा-लोकोक्ति कोश - हरिवंशराय शर्मा

कृपया उपर्युक्त पुस्तकें उचित कमीशन काटकर शीघ्र ही वी.पी.पी. (Value Payable Post) से भेजें।

भवदीय,
प्रीति शाह
शांतिभवन, एम.जी. रोड, राजकोट-360001

डायरी लेखन

'डायरी' शब्द अंग्रेजी भाषा का है। हिंदी में इसे 'दैनंदिनी' या 'दैनिकी' कहते हैं। डायरी में निजी जीवन में प्रतिदिन घटित घटनाओं का लेखा-जोखा रखा जाता है।

डायरी-लेखन की विशेषताएँ:

  • क्रमबद्धता होनी चाहिए।
  • विवरण संक्षिप्त, सारगर्भित और वास्तविक होना चाहिए।
  • स्थान, तिथि, घटना या तथ्य का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
  • आलोचना, टीका-टिप्पणी, बनावटीपन और अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए।

डायरी-लेखन के लाभ:

  • जीवन की घटनाओं की जानकारी मिलती है।
  • अच्छे-बुरे कामों का उल्लेख होने से बुराइयों से बचा जा सकता है।
  • यह एक ऐसा दस्तावेज है जिससे पिछले अनुभवों की जानकारी मिलती है।

डायरी-लेखन के उदाहरण

(1) अपने नए विद्यालय के पहले दिन की घटनाओं को अपनी डायरी में लिखिए।

7 अगस्त, 2010, जामनगर
आज नए विद्यालय में मेरा पहला दिन था। मन में विभिन्न प्रकार के विचारों की उथल-पुथल चल रही थी तथा अनेक अनजानी आशंकाएँ अनायास ही मुझे डरा रही थीं। 9:00 बजे पिताजी के साथ मैं अपने नए विद्यालय आदर्श मंदिर में पहुँचा। प्रधानाचार्य कक्ष में जाने पर उन्होंने मुझसे कुछ प्रश्न किए, जिनके उत्तर मैंने दे दिए। मेरे उत्तरों से वे संतुष्ट नज़र आए। उन्होंने मुझे प्रवेश के लिए निर्धारित फार्म दे दिया। मन को राहत मिली। थोड़ी ही देर में शुल्क आदि जमा करवाने के बाद मैं अपनी नई कक्षा में पहुँच गया। अपने नए दोस्तों, अध्यापक और आचार्य से मिलकर ऐसा नहीं लगा कि मैं नये विद्यालय में आ गया हूँ।


(2) वार्षिक परीक्षा के एक दिन पूर्व के अनुभव को अपनी डायरी में लिखिए।

5 अप्रैल 2012, राजकोट
कल वार्षिक परीक्षा का पहला दिन है। रात्रि के 1:00 बज गए हैं, परंतु नींद नहीं आ रही। कल विज्ञान और टेक्नोलॉजी विषय की परीक्षा है। यद्यपि सब कुछ दुहरा लिया है, तथापि मन में अजीब सा भय है। अचानक पिताजी मेरे कमरे में आए। मुझे जगा हुआ देखकर ढाढ़स बंधाया और बिस्तर पर लेटने को कहा, बत्ती बंद कर दी। बिस्तर पर पड़े-पड़े भी नींद नहीं आ रही। पिताजी के चले जाने पर टेबल लैंप जलाया और पुस्तक के पन्ने पुनः पलटने लगा। थोड़ी देर में थककर बिस्तर पर पुनः लेट गया और न जाने कब नींद आ गई।

अभ्यास (प्रश्नोत्तर)

प्रश्न 1. निर्देशित विषय के बारे में पत्र लिखिए :

(1) यात्रा/प्रवास का वर्णन (मित्र को):
(संकेत: "प्रिय मित्र, पिछले सप्ताह हम आबू गए थे। वहाँ नक्की झील में नौकाविहार किया...")

(2) बीमारी के अवकाश के लिए (कक्षा-शिक्षक को):
(संकेत: "सेवा में, कक्षा-शिक्षक महोदय... सविनय निवेदन है कि मुझे कल रात से तेज़ बुखार है, इसलिए मैं स्कूल नहीं आ सकूँगा।")

(3) स्कूल की समस्या (प्रधानाचार्य को):
(संकेत: "सेवा में, प्रधानाचार्य महोदय... हमारे पुस्तकालय में हिंदी शब्दकोश की कमी है। कृपया उचित व्यवस्था करें।")

प्रश्न 2. सोचिए और लिखिए :

(1) एस.एम.एस. द्वारा बधाई संदेश: "प्रिय मित्र, जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयाँ! तुम जियो हज़ारों साल। - तुम्हारा मित्र"

(2) ई-मेल द्वारा छुट्टियों का वर्णन: "प्रिय मित्र, इस बार छुट्टियों में मैंने चित्रकारी सीखी और नानी के घर गया। मैंने बहुत सारी कहानियाँ भी पढ़ीं।"

प्रश्न 3. दिए गए प्रशासकीय शब्दों के आधार पर वाक्य बनाइए :
  • (1) अधीक्षक (Superintendent): छात्रावास के अधीक्षक ने छात्रों की समस्या सुनी।
  • (2) प्रभारी (In-charge): श्री शर्मा जी इस विभाग के प्रभारी अधिकारी हैं।
  • (3) आयकर (Income Tax): प्रत्येक नागरिक को समय पर आयकर भरना चाहिए।
  • (4) प्रशासन (Administration): जिले का प्रशासन जिलाधिकारी के हाथ में होता है।
प्रश्न 4. डायरी के रूप में लिखिए :
(छात्र अपने अनुभव के आधार पर लिखें।)
(1) पूरे दिन का अनुभव: आज सुबह जल्दी उठा, स्कूल गया, दोस्तों के साथ खेला...
(2) पुरस्कार मिलने का अनुभव: आज मैं बहुत खुश हूँ। मुझे सर्वश्रेष्ठ वक्ता का इनाम मिला...
(3) सुखद अनुभव: आज मम्मी ने मेरी पसंद का खाना बनाया...

स्वाध्याय (सम्पूर्ण हल)

प्रश्न 1. नीचे दिए गए डायरी के अंश का अपनी मातृभाषा (गुजराती) में अनुवाद कीजिए :
हिन्दी: आज दिनांक 10 अगस्त, 2011 रात को नींद नहीं आ रही थी। खुशी का ठिकाना न था। कब सुबह हो जाए इसका इंतजार था। स्कूल से सैर जाने के आनंद में कल्पना करते-करते मुझे नींद आ गई। बड़े सबेरे 4:00 बजे अलार्म बजा और मम्मी की आवाज़ आई, "राकेश उठो, चार बज गए।" मैं आनंद तथा उत्साह से उठा। मन में डर भी था की मास्टरजी डाँटे नहीं। स्नानादि संपन्न करके स्कूल पहुँचा। सब साथी आ पहुँचे थे। मास्टरजी ने सबको बस में बैठाया और हम सैर के लिए निकल पड़े।
ગુજરાતી અનુવાદ:
આજે તારીખ ૧૦ ઓગસ્ટ, ૨૦૧૧, રાત્રે ઊંઘ આવતી નહોતી. આનંદનો કોઈ પાર નહોતો. ક્યારે સવાર પડે તેની રાહ હતી. સ્કૂલમાંથી પ્રવાસમાં જવાના આનંદની કલ્પના કરતા-કરતા મને ઊંઘ આવી ગઈ. વહેલી સવારે ૪:૦૦ વાગ્યે એલાર્મ વાગ્યો અને મમ્મીનો અવાજ આવ્યો, "રાકેશ ઊઠ, ચાર વાગી ગયા." હું આનંદ અને ઉત્સાહથી ઊઠ્યો. મનમાં ડર પણ હતો કે શિક્ષક ખીજાય નહીં. સ્નાનાદિ પતાવીને હું સ્કૂલે પહોંચ્યો. બધા સાથીઓ આવી પહોંચ્યા હતા. શિક્ષકે બધાને બસમાં બેસાડ્યા અને અમે પ્રવાસ માટે નીકળી પડ્યા.

योग्यता विस्तार

पत्र-लेखन के लिए ध्यान देने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें:

  • पत्र की भाषा सरल होनी चाहिए।
  • आवश्यक बातें ही लिखें, पत्र अधिक लम्बा न हो।
  • मित्र/छोटों के लिए 'तुम' और बड़ों के लिए 'आप' का प्रयोग करें।
  • पत्र में ऊपर बाईं ओर अपना पता और तारीख लिखें।
  • संबोधन और अभिवादन शिष्ट भाषा में हो।
  • अंत में नीचे बाईं ओर अपना संबंध और नाम लिखें।

संबोधन, अभिवादन आदि की तालिका

पत्र का प्रकार संबंध अभिवादन संबंधी शब्द समाप्ति (शब्दावली)
व्यक्तिगत पत्र पुत्र पिता को / शिष्य गुरु को पूज्य/पूजनीय पिताजी/गुरुजी आपका आज्ञाकारी पुत्र/शिष्य
मित्र को प्रिय मित्र तुम्हारा मित्र/शुभेच्छु
व्यावसायिक पत्र पुस्तके विक्रेता/बैंक मैनेजर को महोदय भवदीय
कार्यालयी पत्र अधिकारी को मान्यवर भवदीय/निवेदक
प्रार्थना पत्र प्रधानाचार्य को श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय आपका आज्ञाकारी शिष्य

प्रकल्प कार्य (Project Work):

विविध डाक टिकटों का संकलन कीजिए। (छात्र डाकघर जाकर टिकट इकट्ठे करें और अपनी कॉपी में चिपकाएं।)

--- इकाई १ समाप्त ---

हिन्दी क्विज़ : एकમ 1

पत्र एवं डायरी

नमस्ते प्रिय छात्रों और शिक्षकों 🙏

इस पाठ में 'पत्र लेखन' और 'डायरी लेखन' की कला को विस्तार से समझाया गया है। क्विज़ के उच्च स्तरीय (HOTS) प्रश्नों के उत्तर देने के लिए यह वीडियो देखना अत्यंत आवश्यक है। वीडियो में पत्र के प्रकार और प्रशासनिक शब्दों की गहराई से समझ दी गई है। कृपया इसे एक बार ध्यान से देखें।

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