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Class 6 Hindi Chapter 1 Quiz | Itni Shakti Hamein Dena Data | 25 Marks Online Test

पाठ 1 : इतनी शक्ति हमें देना दाता (सम्पूर्ण हल)

पाठ 1 : इतनी शक्ति हमें देना दाता (सम्पूर्ण हल)

काव्य का भावार्थ (Poem Explanation)

1. इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो ना।
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना॥

भावार्थ: हे ईश्वर! आप हमें इतनी ताकत (शक्ति) दें कि आप पर से हमारा भरोसा (विश्वास) कभी कम न हो। हम हमेशा अच्छाई और ईमानदारी के रास्ते पर चलें और हमसे भूलकर भी कोई गलती न हो।

2. दूर अज्ञान के हो अँधेरे, तू हमें ज्ञान की रोशनी दे।
हर बुराई से बचते रहें हम, जितनी भी दे भली ज़िन्दगी दे।
बैर हो ना किसी का किसी से, भावना मन में बदले की हो ना॥

भावार्थ: हे प्रभु! हमारे जीवन से अज्ञान का अँधेरा दूर कर हमें ज्ञान का प्रकाश दीजिए। हम हर तरह की बुराई से बचते रहें। आप हमें जितनी भी ज़िंदगी दें, वह भलाई वाली हो। किसी से हमारी दुश्मनी न हो और अगर हो भी जाए, तो हमारे मन में बदला लेने की भावना न आए।

3. हम न सोचें हमें क्या मिला है, हम ये सोचें किया क्या है अर्पण।
फूल खुशियों के बाँटें सभी को, सबका जीवन ही बन जाए मधुबन।
अपनी करुणा का जल तू बहा के, कर दे पावन हर एक मन का कोना॥

भावार्थ: हम यह न सोचें कि हमें दुनिया से क्या मिला है, बल्कि यह सोचें कि हमने दुनिया को क्या दिया है (अर्पण किया है)। हम सभी को खुशियों के फूल बाँटें ताकि सबका जीवन उपवन (बगीचे) जैसा सुंदर बन जाए। हे ईश्वर! आप अपनी दया का जल बहाकर हम सबके मन को पवित्र कर दीजिए।

4. हम अँधेरे में हैं रोशनी दे, खो न दें खुद को ही दुश्मनी से।
हम सजा पाएँ अपने किये की, मौत भी हो तो सह लें खुशी से।
कल जो गुज़रा है फिर से न गुज़रे, आनेवाला वो कल ऐसा हो ना॥

भावार्थ: हे ईश्वर! हम अज्ञान के अँधेरे में हैं, आप हमें ज्ञान की रोशनी दीजिए। हम एक-दूसरे से दुश्मनी करके खुद को बर्बाद न कर लें। अगर हमसे कोई गलती हो, तो हम उसकी सजा खुशी-खुशी भुगत लें, यहाँ तक कि मौत भी स्वीकार कर लें। जो बुरा कल बीत गया, वह दोबारा न आए, हमारा भविष्य अच्छा हो।

5. हर तरफ़ ज़ुल्म है बेबसी है, सहमा-सहमा-सा हर आदमी है।
पाप का बोझ बढ़ता ही जाए, जाने कैसे ये धरती थमी है।
बोझ ममता से तू ये उठा ले, तेरी रचना का ही अंत हो ना॥

भावार्थ: आज दुनिया में हर तरफ अत्याचार और लाचारी है। हर इंसान डरा हुआ है। पाप का बोझ बढ़ता जा रहा है, पता नहीं धरती यह बोझ कैसे सहन कर रही है। हे परमात्मा! आप अपनी ममता से इस बोझ को उठा लीजिए, ताकि आपकी बनाई हुई यह दुनिया (रचना) नष्ट न हो जाए।

अभ्यास (Abhyas)

प्रश्न 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(1) 'मन का विश्वास कमज़ोर हो ना' ऐसा कवि क्यों कहते हैं?

उत्तर: लोग भगवान की शक्ति पर विश्वास करते हैं। वे मानते हैं कि भगवान दयालु हैं और वे सबकी रक्षा करते हैं। कवि चाहते हैं कि मुसीबत के समय भी यह भरोसा न टूटे, इसलिए वे भगवान से प्रार्थना करते हैं कि 'मन का विश्वास कमज़ोर हो ना'।

(2) धरती पर हर तरफ क्या है? क्यों है?

उत्तर: धरती पर हर तरफ जुल्म और बेबसी है। हर आदमी डरा-डरा सा है। कोई ऐसी शक्ति दिखाई नहीं देती जो राक्षसों का सामना करे और उन्हें रोके।

(3) हम जगत में क्या अर्पण करना चाहते हैं? क्यों?

उत्तर: हम जगत में सुख-शांति और खुशियाँ अर्पण करना चाहते हैं ताकि सबका जीवन सुंदर और खुशहाल बन सके।

(4) हम सभी को क्या बाँटना चाहते हैं? क्यों?

उत्तर: हम सभी को खुशियों के फूल बाँटना चाहते हैं, ताकि सबका जीवन 'मधुबन' (बगीचे) जैसा सुंदर बन जाए।

(5) 'सब का जीवन भी बन जाये मधुबन' का भावार्थ क्या है?

उत्तर: 'मधुबन' का अर्थ है - उपवन या बगीचा। जिस तरह बगीचे में खिले हुए फूल अपनी खुशबू से वातावरण को महका देते हैं, उसी तरह हम भी अपने अच्छे कार्यों से दुनिया में खुशियाँ फैलाएँ, ताकि सबका जीवन सुखी और सुंदर बन जाए।

प्रश्न 2. उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

(1) राधा पढ़ने में तेज़ है लेकिन खेल में नहीं。

(2) रोहित बहुत तेज़ भागा क्योंकि वह गाड़ी पकड़ना चाहता था।

(3) सुरेश को बुखार था, फिर भी वह स्कूल आया।

(4) मैं समझता हूँ कि वह क्या कहना चाहता है।

(5) आप चाय पसंद करेंगे या कॉफी?

(6) मैंने सुबह ही पढ़ाई कर ली ताकि शाम को खेल सकूँ।

(7) अध्यापक रुक गए और लड़के के बोलने की प्रतीक्षा करने लगे।

प्रश्न 3. चर्चा कीजिए : बारिश होनी चाहिए या नहीं?

चर्चा (पक्ष - विपक्ष):

बारिश होनी चाहिए: बारिश के बिना जीवन संभव नहीं है। बारिश होने से धरती हरी-भरी बनती है, खेतों में अच्छी फसल होती है और पीने का पानी मिलता है। गर्मी से राहत मिलती है और नदियाँ बहने लगती हैं।

बारिश नहीं होनी चाहिए (नुकसान): अगर बहुत ज्यादा बारिश हो तो बाढ़ आ जाती है। चारों तरफ कीचड़ और गंदगी फैलती है, जिससे बीमारियाँ बढ़ती हैं। कच्ची सड़कें टूट जाती हैं और जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

निष्कर्ष: बारिश जरूरी है, लेकिन वह संतुलित मात्रा में होनी चाहिए।

प्रश्न 4. विशेषणों का उपयोग करके वाक्य बनाइए :

विशेषणवाक्य प्रयोग
सुंदरयह फूल सुंदर है।
चारमेरे पास चार किताबें हैं।
उसकाउसका घर बड़ा है।
थोड़ामुझे थोड़ा पानी चाहिए।
लालमुझे लाल गुलाब पसंद है।
तीसरावह कक्षा में तीसरा आया।
पंद्रहएक पखवाड़े में पंद्रह दिन होते हैं।

प्रश्न 5. संयुक्ताक्षर से शब्द बनाकर वाक्य प्रयोग :

संयुक्ताक्षरशब्दवाक्य प्रयोग
च् + चकच्चायह आम कच्चा है।
त् + तकुत्ताकुत्ता वफादार जानवर है।
न् + नअन्नकिसान अन्न पैदा करता है।
द् + धबुद्धभगवान बुद्ध ने शांति का संदेश दिया।
द् + वद्वारमंदिर का द्वार खुला है।
श् + वविश्वभारत विश्व में महान देश है।
ह् + यअसह्यगर्मी असह्य हो गई है।
द् + मपद्मपद्म का अर्थ कमल होता है।

स्वाध्याय (Swadhyay)

प्रश्न 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

(1) हमें कैसे रास्ते पर चलना चाहिए? क्यों?

उत्तर: हमें 'नेक' (ईमानदारी और सच्चाई) के रास्ते पर चलना चाहिए, ताकि हम जीवन में किसी भी प्रकार की भूल करने से बच सकें।

(2) आनेवाला कल कैसा होगा?

उत्तर: आनेवाला कल बीते हुए कल से बेहतर और अच्छा होगा। हम ऐसी आशा करते हैं कि बीते कल में जो बुरी घटनाएँ घटीं, वे भविष्य में न घटें।

(3) हम ईश्वर से कैसी जिंदगी की कामना करते हैं?

उत्तर: हम ईश्वर से 'भली' (अच्छी) जिंदगी की कामना करते हैं। हम चाहते हैं कि बुराई से बचे रहें और नेक काम करें।

(4) हमारे मन में कैसी भावना नहीं होनी चाहिए?

उत्तर: हमारे मन में किसी के प्रति 'बैर' (दुश्मनी) या 'बदले' की भावना नहीं होनी चाहिए।

(5) हमें किसके बारे में सोचना चाहिए?

उत्तर: हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हमें दूसरों से क्या मिला है, बल्कि हमें यह सोचना चाहिए कि हमने दूसरों के लिए क्या किया है (क्या अर्पण किया है)।

(6) हमारा मन पावन कैसे बनेगा?

उत्तर: ईश्वर अपनी करुणा (दया) का जल बहाकर हमारे मन के कोने-कोने को धो देंगे, तब हमारा मन पावन (पवित्र) बनेगा।

(7) कविता में कैसा जल बहाने की प्रार्थना की गई है? क्यों?

उत्तर: कविता में 'करुणा' (दया) का जल बहाने की प्रार्थना की गई है, ताकि सब लोगों के मन पवित्र हो जाएँ और बुराइयाँ धुल जाएँ।

(8) किसकी रचना का अंत नहीं होना चाहिए?

उत्तर: ईश्वर की बनाई हुई इस 'रचना' (सृष्टि/मानव जाति) का अंत नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 2. समान तुकवाले (Rhyming) शब्द लिखिए :

शब्दसमान तुकवाले शब्द
लताएँकथाएँ, प्रथाएँ, व्यथाएँ, घटाएँ
सुंदरतामानवता, दानवता, महानता, सज्जनता
ग्वालिनमालिन, सुनारिन, लुहारिन, धोबिन
लिखावटबनावट, सजावट, रुकावट, मिलावट
सुनकरपढ़कर, लिखकर, चलकर, कहकर
चिड़ियाँगुड़िया, बुढ़िया, पुड़िया, चुहिया

प्रश्न 3. चित्र वर्णन :

समुद्र किनारे का दृश्य:

यह समुद्र किनारे का चित्र है। समुद्र का पानी हिलोरे ले रहा है। किनारे पर बच्चे खेल रहे हैं। कुछ बच्चे रेत के घर बना रहे हैं। एक लड़का पतंग उड़ा रहा है। समुद्र में एक नाव तैर रही है। कुछ लोग समुद्र में तैरने का आनंद ले रहे हैं। एक गुब्बारेवाला रंग-बिरंगे गुब्बारे बेच रहा है। पास ही एक ठेलेवाला नाश्ता बेच रहा है। कुछ लोग कुर्सियों पर बैठकर समुद्र की लहरों का आनंद ले रहे हैं। सूर्योदय या सूर्यास्त का समय लग रहा है। यह दृश्य बहुत ही सुहावना है।

प्रश्न 4. मातृभाषा (गुजराती) में अनुवाद :

हिंदी परिच्छेद:
एक चिड़िया पेड़ पर रहती थी। उसका घोंसला पेड़ पर था। घोंसले में उसके तीन बच्चे थे। वह अपने बच्चों के साथ रहती थी। एक दिन एक शिकारी वहाँ आया। वह चिड़िया को मारना चाहता था। चिड़िया ने बच्चों को घोंसले में सिर नीचा कर बैठने को कहा। वह खुद वहाँ से उड़ गई और पत्तों में छिपकर बैठ गई। शिकारी चिड़िया को न देखकर वहाँ से चला गया。


ગુજરાતી અનુવાદ:
એક ચકલી ઝાડ પર રહેતી હતી. તેનો માળો ઝાડ પર હતો. માળામાં તેના ત્રણ બચ્ચાં હતાં. તે તેના બચ્ચાં સાથે રહેતી હતી. એક દિવસ એક શિકારી ત્યાં આવ્યો. તે ચકલીને મારી નાખવા ઇચ્છતો હતો. ચકલીએ બચ્ચાંને માળામાં માથું નીચું કરી બેસવા કહ્યું. તે પોતે ત્યાંથી ઊડી ગઈ અને પાંદડાઓમાં છુપાઈને બેસી ગઈ. શિકારી ચકલીને ન જોઈને ત્યાંથી ચાલ્યો ગયો.

प्रश्न 5. काव्य पंक्तियों का भावार्थ :

(1) बैर हो ना किसी का किसी से, भावना मन में बदले की हो ना...

भावार्थ: कवि कहते हैं कि हमें किसी के साथ दुश्मनी नहीं करनी चाहिए। यदि कोई हमारे साथ बुरा व्यवहार करे, तो भी हमें उससे बदला लेने की भावना नहीं रखनी चाहिए। बदला लेने से बुराई बढ़ती है, जबकि क्षमा करने से प्रेम बढ़ता है。

(2) अपनी करुणा का जल तू बहा के, कर दे पावन हर एक मन का कोना...

भावार्थ: कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु! आप अपनी दया (करुणा) की वर्षा कीजिए। उस पवित्र जल से हम सबके मन के कोने-कोने में छिपी बुराई और मैल को धो दीजिए, ताकि हमारा मन पूरी तरह पवित्र और निर्मल हो जाए。

--- पाठ 1 समाप्त ---

📖 पाठ 2 : इतनी शक्ति हमें देना दाता

✍️ कवि (Poet):
अभिलाष (Abhilash)
🎶 साहित्य प्रकार:
प्रार्थना काव्य
🎬 स्रोत (Source):
फिल्म 'अंकुश' (1986)
💡 पाठ का सार:

यह एक प्रार्थना है जिसमें कवि ईश्वर से 'शक्ति' माँगते हैं ताकि मन का विश्वास कमज़ोर न हो। हम नेक रास्ते पर चलें और अज्ञान के अँधेरे को दूर करें।

Std 6 Hindi Test Score: 0
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कुल प्रश्न: 25 | कुल मार्क्स: 25

🎯 Adhyayan Nishpatti (L.O.) Based Test



Question 1/25
LO: H.6.1
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Std 6 - Hindi - Chapter 2

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